🏏🇮🇳 ओवल टेस्ट में भारत की जीत के पीछे ‘श्री शिव रुद्राष्टकम्’, इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम को हुआ अद्भुत अनुभव
नवीन समाचार, नई दिल्ली, 13 अगस्त 2025 (Shri Shiv Rudrashtakam behind India Victory)। इंग्लैंड के साथ पाँच टेस्ट मैचों की श्रृंखला 2-2 से बराबर कराने के बाद भारतीय टीम इन दिनों श्री शिव रुद्राष्टकम् स्तुति बड़े मन से सुन रही है। 1 अगस्त से 5 अगस्त 2025 तक खेले गए इस मैच में भारत ने 6 रनों से रोमांचक जीत प्राप्त की। ओवल टेस्ट के दौरान ड्रेसिंग रूम में यह स्तुति पाँचों दिन लगातार गूंजती रही।
टीम के एक सदस्य ने बताया कि ओवल में अंतिम मैच में भारत को श्रृंखला बचाने के लिए हर हाल में जीतना आवश्यक था, लेकिन पहली पारी में भारत ने मात्र 38 रन पर यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल के विकेट गंवा दिए थे। इसी बीच टीम के मुख्य थ्रोडाउन विशेषज्ञ रघु ने ड्रेसिंग रूम में ‘श्री शिव रुद्राष्टकम्’ बजाना शुरू किया, जिसने खिलाड़ियों के मनोबल को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया।
श्री शिव रुद्राष्टकम् की मान्यता
मान्यता है कि यदि कोई शत्रु परेशान कर रहा हो, तो शिव मंदिर या घर में कुशा के आसन पर बैठकर सात दिन तक प्रातः व सायं श्री शिव रुद्राष्टकम् का पाठ करने से शिव जी बड़े से बड़े शत्रु का नाश कर देते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भी रावण पर विजय पाने के लिए रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना कर इस स्तुति का पाठ किया था और शिव की कृपा से रावण का अंत हुआ था।
ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक माहौल
टीम के एक अन्य सदस्य ने बताया कि इंग्लैंड दौरे के दौरान अभ्यास के समय अक्सर गाने बजते थे, कई बार हनुमान चालीसा भी सुनाई जाती थी, लेकिन पाँच दिन तक श्री शिव रुद्राष्टकम् सुनना पहली बार हुआ। उनका कहना था कि यह जीत का एकमात्र कारण नहीं था, परंतु इससे खिलाड़ियों को विशेष ऊर्जा और एकजुटता का भाव मिला।
रोमांचक अंदाज़ में वापसी
श्रृंखला में भारत लीड्स टेस्ट हारकर और लॉर्ड्स में जीतकर 1-1 से बराबरी पर था, लेकिन तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने बढ़त बना ली थी। मैनचेस्टर टेस्ट ड्रॉ होने के बाद ओवल में अंतिम मुकाबला निर्णायक था। भारत ने छह रन से जीत हासिल कर न केवल श्रृंखला बराबर की, बल्कि कठिन परिस्थिति में वापसी का शानदार उदाहरण भी पेश किया। मैच के दौरान और बाद में भी खिलाड़ियों की कारों में यह स्तुति गूंजती रही, जो मनोबल को ऊँचा रखने का प्रतीक बन गई।
श्री शिव रूद्राष्टकम 
नमामीशमीशान निर्वाण रूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदः स्वरूपम् ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम् ॥
निराकार मोंकार मूलं तुरीयं, गिराज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् ।
करालं महाकाल कालं कृपालुं, गुणागार संसार पारं नतोऽहम् ॥
तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरम् ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा, लसद्भाल बालेन्दु कण्ठे भुजंगा॥
चलत्कुण्डलं शुभ्र नेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीश चर्माम्बरं मुण्डमालं, प्रिय शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥
प्रचण्डं प्रकष्टं प्रगल्भं परेशं, अखण्डं अजं भानु कोटि प्रकाशम् ।
त्रयशूल निर्मूलनं शूल पाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भाव गम्यम् ॥
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सच्चिनान्द दाता पुरारी।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।
न तावद् सुखं शांति सन्ताप नाशं, प्रसीद प्रभो सर्वं भूताधि वासं ॥
न जानामि योगं जपं नैव पूजा, न तोऽहम् सदा सर्वदा शम्भू तुभ्यम् ।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभोपाहि आपन्नामामीश शम्भो ॥
रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये
ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।।
॥ इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥
हिंदी अर्थ (Shri Shiv Rudrashtakam behind India Victory)
हे मोक्षरूप, विभु, व्यापक ब्रह्म, वेदस्वरूप ईशानदिशा के ईश्वर और सबके स्वामी शिवजी, मैं आपको नमस्कार करता हूं। निज स्वरूप में स्थित, भेद रहित, इच्छा रहित, चेतन, आकाश रूप शिवजी मैं आपको नमस्कार करता हूं। निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलाशपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे परमेशवर को मैं नमस्कार करता हूं।
जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गंभीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है, जिनके सिर पर सुंदर नदी गंगाजी विराजमान हैं, जिनके ललाट पर द्वितीया का चंद्रमा और गले में सर्प सुशोभित है। जिनके कानों में कुंडल शोभा पा रहे हैं। सुंदर भृकुटी और विशाल नेत्र हैं, जो प्रसन्न मुख, नीलकंठ और दयालु हैं। सिंह चर्म का वस्त्र धारण किए और मुण्डमाल पहने हैं, उन सबके प्यारे और सबके नाथ श्री शंकरजी को मैं भजता हूं।
प्रचंड, श्रेष्ठ तेजस्वी, परमेश्वर, अखण्ड, अजन्मा, करोडों सूर्य के समान प्रकाश वाले, तीनों प्रकार के शूलों को निर्मूल करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किए, भाव के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी के पति श्री शंकरजी को मैं भजता हूं। कलाओं से परे, कल्याण स्वरूप, प्रलय करने वाले, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुरासुर के शत्रु, सच्चिदानन्दघन, मोह को हरने वाले, मन को मथ डालनेवाले हे प्रभो, प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए।
जब तक मनुष्य श्री पार्वतीजी के पति के चरणकमलों को नहीं भजते, तब तक उन्हें न तो इस लोक में, न ही परलोक में सुख-शांति मिलती है और अनके कष्टों का भी नाश नहीं होता है। अत: हे समस्त जीवों के हृदय में निवास करने वाले प्रभो, प्रसन्न होइए। मैं न तो योग जानता हूं, न जप और न पूजा ही। हे शम्भो, मैं तो सदा-सर्वदा आप को ही नमस्कार करता हूं। हे प्रभो! बुढ़ापा तथा जन्म के दुख समूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दुखों से रक्षा कीजिए। हे शंभो, मैं आपको नमस्कार करता हूं। जो भी मनुष्य इस स्तोत्र को भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उन पर भोलेनाथ विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं।
आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से यहाँ, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से, टेलीग्राम से, कुटुंब एप से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..।
(Shri Shiv Rudrashtakam behind India Victory, India Vs England Test Series, Oval Test 2025, Shiv Rudrashtakam, Team India Victory, Indian Cricket Dressing Room, Spiritual Motivation In Sports, Raghu Throwdown Specialist, Yashasvi Jaiswal, KL Rahul, Lord Ram And Rudrashtakam)
Discover more from Navin Samachar-Viral News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
